किसान की बेटी डॉ. साधना यादव ने बढ़ाया गाजीपुर का मान, IIT-BHU से भौतिक विज्ञान में हासिल की पीएचडी की उपाधि

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किसान की बेटी डॉ. साधना यादव ने बढ़ाया गाजीपुर का मान, IIT-BHU से भौतिक विज्ञान में हासिल की पीएचडी की उपाधि

राजीव कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट

गाजीपुर। जिले के कासिमाबाद ब्लॉक के नदुला गांव की बेटी डॉ. साधना यादव ने अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के बल पर बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे जनपद का गौरव बढ़ाया है। साधारण किसान परिवार में जन्मी साधना यादव को 31 अक्टूबर 2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय), वाराणसी से भौतिक विज्ञान एवं मैटेरियल साइंस में पीएचडी की उपाधि प्राप्त हुई। उनकी इस सफलता से परिवार, गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
डॉ. साधना यादव के पिता श्री हरेराम सिंह यादव साधारण किसान हैं। उनके दादा स्वर्गीय शंभू सिंह यादव प्रधानाध्यापक थे। उनका सपना था कि उनकी पोती उच्च शिक्षा हासिल कर अपने नाम के आगे डॉक्टर लिखवाए। आज साधना ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर अपने दादा के उस सपने को साकार कर दिया। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

 


साधना की प्रारंभिक शिक्षा गांव के श्री रमई बाबा ओमप्रकाश बलराम विद्यापीठ, सिहनी ढोटारी, गाजीपुर में कक्षा एक से पांच तक हुई। इसके बाद उन्होंने नेशनल इंटर कॉलेज, कासिमाबाद से कक्षा छह से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान में बीएससी की। इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से भौतिक विज्ञान एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विषय में दोहरी एमएससी की डिग्री हासिल की। अपनी शैक्षणिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी से भौतिक विज्ञान एवं मैटेरियल साइंस में शोध कार्य पूरा कर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

 


शोध कार्य के दौरान डॉ. साधना यादव को विदेश यात्रा करने का भी अवसर मिला, जहां उन्होंने अपने शोध एवं शैक्षणिक अनुभवों को और समृद्ध किया।
परिवार में उनकी तीन बहनें और एक छोटा भाई जसपाल सिंह यादव हैं। वह अपने पिता की दूसरी संतान हैं। उनके चाचा रामजी सिंह यादव रेलवे पुलिस में गोल्ड मेडलिस्ट होने के साथ राष्ट्रीय स्तर के पहलवान भी हैं।
डॉ. साधना यादव की यह सफलता केवल उनके परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की उन बेटियों के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। किसान की बेटी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी मेहनत से जो मुकाम हासिल किया है, उससे नदुला गांव सहित पूरे गाजीपुर जनपद का नाम रोशन हुआ है।

 

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