पराली जलाने से बचें किसान, पर्यावरण संरक्षण में निभाएं अपनी भागीदारी : डीएम

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डीएम ने फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

पराली जलाने से बचें किसान, पर्यावरण संरक्षण में निभाएं अपनी भागीदारी : डीएम

बलिया। फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने शनिवार को तहसील सिकंदरपुर से प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस वाहन के माध्यम से किसानों को पराली न जलाने, फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में पूरा विश्व पर्यावरण संकट और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की बढ़ती मात्रा और तापमान में लगातार हो रही वृद्धि चिंता का विषय है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण के लिए किसानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने किसानों से अपील की कि धान की कटाई के बाद खेतों में बची पराली को किसी भी स्थिति में न जलाएं।
उन्होंने कहा कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वातावरण को प्रदूषित करता है और इससे वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विशेषकर दीपावली के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए किसानों को फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करना चाहिए। जिलाधिकारी ने किसानों को सुझाव दिया कि खेतों में बचे फसल अवशेषों को गड्ढे में एकत्र कर जैविक खाद तैयार करें और उसका दोबारा खेतों में उपयोग करें। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी। फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर भी उनका बेहतर उपयोग किया जा सकता है।


उन्होंने कहा कि पराली का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने से खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता। प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की गई कि वे पराली जलाने की प्रथा को पूरी तरह बंद कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने सभी किसान भाइयों को दीपावली पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।

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