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वायरल फीवर से अस्पतालों में मरीजों की भीड़।

मऊ। तेज धूप और उमस भरी गर्मी लोगों को बीमार करने लगी है। जिला अस्पताल सहित सीएचसी व पीएचसी पर डायरिया के साथ बुखार, पेट में दर्द और बेचैनी से शिकार लोग पहुंच रहे हैं। इसके अलावा आंखों व त्वचा से संबंधी बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। भीड़ अत्यधिक होने से चिकित्सक हर मरीज को डेढ़ से दो मिनट का ही समय दे पा रहे हैं। बावजूद पर्ची कटने से लेकर दवा मिलने तक घंटों समय लग रहा है। सामान्य तौर पर हर मरीज को तीन से चार घंटे बाद ही अस्पताल से छुट्टी मिल रही है। वहीं पहले जहां 4 से 5 सौ मरीज आते थे। अब यह संख्या 1000 के पार पहुंच जा रही है। बुधवार को 1067 मरीजों ने ओपीडी में चिकित्सकीय परामर्श लिया। इसमें लगभग सभी को इसी तरह का उपचार में वक्त देना पड़ा। चिकित्सक दवाई से अधिक खानपान में सावधानी की बरतने की सलाह दे रहे हैं।जिले में मौसम बदलने से वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है, लोगों को ठंड लगकर तेज बुखार आ रहा है। सामान्य तौर पर तीन से चार दिन में ठीक होने वाला वायरल बुखार पांच से सात दिन तक चल रहा है। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। अधिक संख्या में बुखार, उल्टी दस्त व डायरिया के मरीजों के पहुंचने से चिकित्सक मरीजों को डेढ़ से दो मिनट ही समय दे पा रहे थे। ओपीडी में दोपहर दो बजे तक मरीजों की लंबी लाइन लगी रही। पैथालॉजी, एक्सरे, दवा काउंटर व पर्चा काउंटर पर भीड़ अधिक होने से अफरा तफरी का माहौल बना रहा। चिकित्सकों के अनुसार सामान्य दिनों में सोमवार से गुरुवार तक 400 से 500 और शुक्रवार-शनिवार को 200 से 300 मरीज आते थे। अब बीते एक सप्ताह से हर दिन 1000 के पार मरीजों की संख्या पहुंच जा रही है। बुधवार को जिला अस्पताल की ओपीडी के लिए 1067 मरीजों ने पंजीकरण कराया। इनमें सबसे अधिक मरीज मौसमी बीमारी के रहे। फिजीशियन डॉ. शैलेश सिंह कुशवाहा ने बताया कि सबसे अधिक मरीज वायरल बुखार के आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वायरल बुखार ठीक होने में एक सप्ताह से अधिक का समय लग रहा है। गंभीर मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पैरासीटामोल, एंटी एलर्जिक दवा के साथ भाप लें। बुखार ठीक होने के बाद खांसी की समस्या बनी रह सकती है। चार से पांच दिन बाद भी बुखार न उतरे तो जांच करा लें।

हर रोज 300 मरीजों की जांच

जिला अस्पताल के लैब पर जांच का बड़ा दबाव है। प्रतिदिन लगभग 300 मरीजों की अलग-अलग जांच हो रही है। इसमें जिन मरीजों का सैंपल 11.30 बजे के पहले लैब में पहुंच जा रहा है, उन्हें दोपहर दो बजे तक रिपोर्ट भी मिल जा रही है। जिसकी सैंपल 11.30 बजे के बाद पहुंच रही है उन्हें अगले दिन जांच रिपोर्ट मिल रहा है। इससे दोपहर बाद वाले मरीज – तीमारदारों को रिपोर्ट दिखाने के लिए अगले दिन ओपीडी में आना मजबूरी बना है।

एक्सरे कक्ष में भी लगी लाइन

जिला अस्पताल में बुधवार को इलाज कराने आए मरीजों को एक्सरे कक्ष के बाहर भारी भीड़ का सामना करना पड़ा। एक्सरे कक्ष के सामने मरीजों की लंबी कतार लगी हुई थी। कोपागंज की सरोज ने बताया कि पैर के पंजे में दर्द हो रहा था। चिकित्सक ने देखने के बाद एक्सरे के लिए भेज दिया। यहां पर भीड़ के चलते दो घंटे बाद नंबर आया। जब तक रिपोर्ट मिलेगी तब तक डाक्टर चले जाएंगे। इसी तरह अन्य मरीज भी एक्सरे कराने के लिए कतार में लगे रहे। दोपहर 12.30 बजे तक 257 मरीजों के एक्सरे हो चुके थे। अभी 100 के करीब और मरीज एक्सरे कराने के लिए लाइन में लगे थे।

टायफाइड का बरकरार है असर

ओपीडी के कक्ष में दोपहर 12.20 बजे चिकित्सक मरीजों-तीमारदारों से घिरे थे। भीड़ लगभग इस वक्त तक थोड़ी हल्की हो चुकी थी। डायरिया, गैस्ट्रो, डिहाइड्रेशन, बुखार, झटके, टायफाइड के मरीजों को चिकित्सक देख रहे थे। चिकित्सक बताते हैं कि हर बीमारी के मरीज सामान्य तौर पर आ रहे हैं, लेकिन टायफाइड का असर बरकरार है।

फोड़े-फुंसी पर बरसात का असर बरकरार

जिला अस्पताल के ओपीडी में दोपहर 1 बजे चिकित्सक को दिखाने के लिए मरीज पंक्तिबद्ध खड़े थे। जमा पर्ची पर एक-एक का नाम लेकर बुलाया जा रहा था। चिकित्सक बताते हैं कि वर्तमान समय में प्रतिदिन बरसाती फोड़े-फुंसी से परेशान 100 से 150 मरीज आ रहे हैं। इनमें खुजली से दाने वाले भी शामिल हैं। उमस के चलते दाद की समस्या बनी है।

बुखार आने पर ये करें

– बुखार और सर्दी जुकाम होने पर पैरासीटामोल टैबलेट ले सकते हैं।

– दो से तीन दिन बाद भी बुखार ठीक न होने पर डाक्टर से परामर्श लेलें ।

– सुबह और शाम भाप लें।

– तरल पेय पदार्थ का सेवन अधिक करें।

– फास्ट फूड, आइसक्रीम का सेवन न करें।

डायरिया के मरीजों की संख्या हुई है कम

ओपीडी में डायरिया के मरीजों की संख्या कम हुई है। सामान्य मरीज प्रतिदिन की तरह आ रहे हैं। पर्याप्त मात्रा में दवाएं मौजूद हैं। जांच भी अंदर से ही कराई जा रही है। मरीज को पर्याप्त सुविधाएं मिले इसका पूरा प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. एपी गुप्ता, सीएमएस-मऊ

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