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” जी-20 भारत की तरक्की का दर्पण “

” वसुधैव कुटुम्बकम् पर दुनिया को भरोसा ”

विश्व की एकता-बंधन के लिए आज से राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन पर समूचे विश्व की निगाह लगी है। जी-20 के सदस्यों सहित कुल मिलाकर 43 देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आ रहे हैं। एक मंच पर पूरी दुनिया होगी ऐसा पहली बार हो रहा है। यह पिछले 17 जी-20 शिखरों के मुकाबले नया कीर्तिमान है। भारत में इतनी बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का एकत्रित होना संयोग की बात नहीं है। यह मेजबान भारत देश द्वारा वैश्विक शासन-संचालन के प्रति निष्ठा और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान हेतु प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि समस्याओं से जूझती दुनिया को भारत मंत्र से निदान की आशा है। पिछले वर्ष दिसंबर में जबसे भारत ने जी-20 का नेतृत्व संभाला तबसे देश के 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 60 से अधिक शहरों में 220 बैठकें आयोजित हो चुकी हैं। समूह के समक्ष विषयों में व्यापकता और विषयवस्तु में गहराई के लिए भारत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। विभिन्न देशों में जी-20 प्रक्रिया का अनुभव करने वाले राजनयिकों एवं विशेषज्ञों का मानना है कि बहुपक्षीय कूटनीति में जान फूंकने का श्रेय भारत के परिश्रम और लगन को दिया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि भारत ने ऐसे नाजुक दौर में वैश्विक नेतृत्व और समन्वय की बागडोर संभाली है, जब वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व बंधुत्व की सफलता पर ही सवाल उठने लगे थे। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कड़वाहट के चलते विभिन्न देशों का एकजुट होकर साझा हितों और विश्व कल्याण के लिए कार्य करना दुर्लभ होता जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मार्च में जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में चेताया भी था कि विश्व बंधुत्व संकट की स्थिति में है और वैश्विक शासन विफल हो गया है। भारत की जी-20 अध्यक्षता ने विशेष रूप से वसुधैव कुटुम्बकम् – विश्व बंधुत्व को अधिक समावेशी और सहभागी बनाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बहुपक्षवाद की धारा के प्रति विश्वास को नए सिरे से बहाल किया है। जी-20 का विस्तार करके 55 देशों वाले अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्यता देने की भारत की पहल ने यह उम्मीद जगाई है । जी-20 के विकसित सदस्य देशों में पिछड़े देशों की आशाओं एवं आकांक्षाओं के बारे में समानुभूति उत्पन्न करती भारत की मेजबानी में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन के द्वारा भारत का प्रयास यह है कि अमीर देशों को दिखाएं कि परस्पर जुड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था में गरीब राष्ट्रों के उद्धार में ही अमीरों का फायदा है।’ ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का यही आशय भी है। विकसित देश ‘सतत विकास’ और ‘सामाजिक न्याय’ की बातें तो करते हैं, लेकिन यह भारत ही है, जिसने उन पर दबाव डाला है कि वे जी-20 के माध्यम से आवश्यक संसाधन प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ें, ताकि ‘सबका विकास’ एक स्वप्न मात्र न रह जाए। विश्व की एकता-बंधन के लिए भारत तैयार है। वसुधैव कुटुम्बकम् पर दुनिया को भरोसा है ।

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